Hindi Poems

मैं वो नही हूं

मैं वो नही हूं
जो दिखती हू तुम्हे
जिम्मेदारियों की
बोझ के तले
दबने के बाद!

मैं वो नही हूं
जो बच जाती है
घड़ी के काटो के पीछे
भागने के बाद!

दफ्तर के
दाव पेच से सेहमी
वो सिर्फ एक परेशानी है
जिसे मैं समझ के
तुम उलझ जाते हो।

भीड़ में उलझी
वो एक उलझन है
जिसे तुम
समझ नही पाते हो।

पसीने की लकीरों के पीछे
जो छुपी सी हसी है
वो मैं हूं।
बर्तन के आवाजों की सन्नाटो में
जो फिक्र बसी है
वो मैं हूं।

मैं बहोत कुछ हूं
और सब कुछ जो हूं
वो सिर्फ तुम्हारे लिए हूं।
मतलबी दुनिया की परत में
एक मुलायम सी बदरिया है सजी
वो मैं हूं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *